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Health Benefits of Thermal Jade Massage Bed

Once the bed is installed in your house, you can experience the soothing benefits anytime you feel pain or uneasiness in your body. Given below are five major health benefits of thermal jade massage beds.

Chiropractic benefits

If you suffer chronic backache or arthritis, this treatment is great for you.Chiropractic is the science of healing discomfort in the bone joints and neuro-musculoskeletal system. Thermal jade massage beds provide chiropractic benefits such as relief from problems of the backbone, spine, muscular spasms and correction of vertebra alignment. These benefits are possible because the massage restores optimum blood flow, flushes out toxins, and soothes joints from within.

Relaxation and stress relief

Spending some time on the thermal jade massage bed restores blood circulation and lends detoxifying effects. So, spend some time on it to relax and experience all your stress flow away. Besides, the infusion of pure oxygen ions into your system promotes cell regeneration.

Acupressure benefits

Acupressure works on the principle of blocking and restarting the flow of energy in your body. This way, energy blocks in your body caused due to toxins are cleared. Energy flows with renewed vigor and you feel refreshed. Several health problems are cured when blood and energy flow in the body are optimum. Thermal jade massage beds provide similar benefits.

Massage benefits

Thermal jade massage beds provide all the benefits that you experience in a massage parlor. Jade stones massage your body and promote the health of your musculoskeletal system, metabolism, nervous system and all vital organs of your body.

Back Pain

कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं। कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है। अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है। यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है। बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है। नतीजा काम करने में परेशानी । कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं।

क्‍यों होता है कमर दर्द

  •  मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।
  • अधिक वजन।
  • गलत तरीके से बैठना।
  • हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
  • गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।
  • शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।
  • अधिक नर्म गद्दों पर सोना।

कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय

1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।

2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।

4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

Diabetes / Madhumeha

मधुमेह: ब्‍लड में शुगर का स्‍तर बढ़ने से डायबिटीज हो जाता है। मधुमेह (madhumeha) के मरीज को थकान और प्‍यास लगने के अलाव कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। तनाव भरा मा‍हौल डायबिटीज रोगी को और अधिक बीमार कर सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा वातावरण होना बहुत जरूरी है। डायबिटीज क्‍या है (मधुमेह, madhumeha kya hai), डायबिटीज होने के कारण (मधुमेह, madhumeha ke karan), डायबिटीज के विभिन्‍न प्रकार, टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज, जेस्टेशनल डायबिटीज, टाइप वन डायबिटीज के जोखिम कारक, टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारक, डायबिटीज का निदान, डायबिटीज के लक्षण (मधुमेह, madhumeha ke lakshan), मधुमेह की जांच, मधुमेह में घर पर कैसे पता करें ग्‍लूकोज का स्‍तर, डायबिटीज के मरीजों के लिए आहार, डायबिटीज के मरीज कैसे जिएं सामान्‍य जीवन, डायबिटीज से संबंधित तथ्‍य, मधुमेह या डायबिटीज में पानी पीने के फायदे,

खाने के तुरंत बाद चाय का सेवन बिलकुल न करें, हो सकती है ये 3 बीमारियां

चाय या कॉफी में ‘टैनिन’ रसायन होता है, जो आयरन के अवशोषण को बाधित करता है। इससे मानसिक और शारीरिक थकान लगती है। जिन महिलाओं को आयरन, कैल्शियम की कमी होती है, उन्हें खाने के बाद चाय बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए। इससे आपको एनीमिया की समस्या हो सकती है।
अधिकतर लोगों को खाना खाने के बाद चाय पीने की आदत होती है। खासतौर पर उन लोगों को दुकानों पर बैठकर काम करते हैं या फिर ऑफिस में लगातार काम के स्ट्रैस की वजह से बार-बार चाय का सेवन करते रहते हैं। लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद चाय पीना, सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होता है। क्या आप जानते हैं कि चाय में एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे शरीर में एसिड बनना शुरू हो जाता है। खाना खाने से हमें, जो प्रोटीन मिलता है उसे यह एसिड सख्त कर देता है, जिस वजह से खाना पचने में बहुत देर लगती है। इससे गैस आदि की समस्या भी बहुत बढ़ जाती है। अगर आपको चाय पीनी भी हैं तो खाना और चाय में एक घंटे का गैप जरूर रखें।
चाय में कैफीन भी काफी पाई जाती है, जो ब्लरड प्रेशर को बढ़ावा देती है। साथ ही कैफीन से शरीर में कई ऐसे हार्मोंस बढ़ जाते है, जिनसे शरीर को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे दिल से संबंधित समस्याएं, डायबिटीज और वजन का बढ़ना आदि। इसके अलावा व्यक्ति को एनीमिया और पाचन क्रिया के खराब होने की भी आशंका रहती है।
चाय में ‘पॉलिफेनोल्स’ और ‘टेनिन्स’ आदि तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए भोजन से आयरन को सोखने नहीं देते हैं। खासतौर पर महिलाएं, जिनमें आयरन की कमी होती है, उनके लिए तो खाने के बाद चाय पीना और भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
चाय या कॉफी में ‘टैनिन’ रसायन होता है, जो आयरन के अवशोषण को बाधित करता है। इससे मानसिक और शारीरिक थकान लगती है। जिन महिलाओं को आयरन, कैल्शियम की कमी होती है, उन्हें खाने के बाद चाय बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए। इससे आपको एनीमिया की समस्या हो सकती है। वहीं, आपको पाचन की सम्या भी हो सकती है। चाय की पत्ती में अम्लीय गुण होते हैं, जो भोजन के प्रोटीन के साथ मिलकर उसे सख्त बना देते हैं। इससे प्रोटीन को पचाने में मुश्किल होती है और पाचन पर असर पड़ता है। जो लोग डायबिटिक हैं, उन्हें चाय का सेवन बिलकुल भई खाने के बाद नहीं करना चाहिए। चाय में मौजूद कैफीन की मात्रा शरीर में कॉर्टिसोल अर्थात स्टेरॉयड हार्मोंस को बढ़ाती है, जिससे शरीर को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें दिल से संबंधित समस्याएं, डायबिटीज और वजन बढ़ना शामिल है।

ज्वाइंट पेन- जोड़ों में दर्द

शरीर के ऐसे हिस्से जहां हड्डियां मिलती हों, जोड़ कहलाते हैं, जैसे घुटने (knee), कंधे (shoulder), कोहनी (elbow) आदि। इन्हीं जोड़ों में कठोरता (stiffness), सूजन (swelling), किसी तरह की तकलीफ जो दर्द का कारण बने, जोड़ों में दर्द कहलाती है। जोड़ों में दर्द एक आम समस्या है जिसमें लगातार अस्पताल जाने या दवा (medicine) खाने की जरूरत नहीं होती।

अर्थराइटिस (arthritis) जोड़ों में दर्द का सबसे आम कारण है लेकिन जोड़ों में दर्द (Jodo me Dard) कई अन्य वजहों जैसे कि लिगामेंट (ligaments), कार्टिलेज (cartilage) या टेंडोंस में से किसी भी संरचना में चोट के कारण से भी हो सकता है। जोड़ शरीर का अहम हिस्सा होते हैं जिनके कारण उठना- बैठना, चलना, शरीर को मोड़ना आदि संभव हो पाता है। ऐसे मे जोड़ों में दर्द होने पर पूरे शरीर का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

ज्वाइंट पेन- जोड़ों में दर्द के लक्षण

कारण (cause of joint pain)

– उम्र बढ़ने के साथ
– हड्डियों में रक्त की आपूर्ति में रूकावट आना
– रक्त का कैंसर होना
– हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
– जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना
– जोड़ों में इंफेक्शन होना
– हड्डियों का टूटना
– मोच आना या चोट लगना
– हड्डियों में ट्यूमर आदि की शिकायत होना
– अर्थराइटिस
– बर्साइटिस
– ऑस्टियोकोंड्राइटिस
– कार्टिलेज का फटना
– कार्टिलेज का घिस जाना

जोड़ों के दर्द से राहत के लिए टिप्स (Tips to prevent joint pain)

1. गतिशील रहें (Keep moving)
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए गतिशील रहें, यानि जोड़ों की मूवमेंट होती रहनी चाहिए। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से भी जोड़ों में कठोरता महसूस होती है।

2. जोड़ों को चोट से बचाएं (Prevent joints from injury)
जोड़ों पर लगी चोट, हड्डी को तोड़ भी सकती है, इसलिए जोड़ों को चोट से बचाकर रखें। जब भी कोई ऐसा खेल खेलें जिसमें जोड़ों पर चोट लगने का डर हो, तो ज्वाइंट सेफ्टी पेड्स (Joint safety pads) पहनें। टेनिस और गोल्फ खेलते समय भी ब्रेसेस (braces) पहनें।

3. वजन को नियंत्रित रखें (Maintain your weight)
यदि आपका वजन नियंत्रण में रहेगा तो आपके जोड़ भी स्वास्थ्य रहेंगे। शरीर का ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज (cartilage) के टूटने का डर रहता है। ऐसे में वजन को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है।

4. स्ट्रेचिंग ज्यादा न करें (Do not stretch more)
व्यायाम करते समय स्ट्रेचिंग करने की भी सलाह दी जाती है, लेकिन स्ट्रेचिंग केवल हफ्ते में तीन बार करें। स्ट्रेचिंग को एकदम शुरू करने की जगह, इससे पहले वार्म अप व्यायाम (warm up exercise) करें।

5. दूध पीएं (Drink milk)
जोड़ों को मजबूत रखने के लिए दूध जरूर पीएं। दूध से हड्डियों को कैल्श्यिम और विटामिन डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यदि दूध पसंद न हो तो दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, दही आदि भी खाए जा सकते हैं।

6. सही पोश्चर बनाए रखें (Maintain right posture)
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सही पोश्चर में उठना, बैठना और चलना बेहद जरूरी है। सही पोश्चर गर्दन से लेकर घुटनों तक के जोड़ों की रक्षा करता है।

7. व्यायाम (Exercise)
जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तैराकी (swimming) भी जोड़ों के दर्द से राहत के लिए अच्छा व्यायाम होती है।